( भगवान राम का कौए से संवाद )
मत छूना कागा मेरी सिए को ,
मैंने उसे बड़े प्रयत्न से पाया है …
समुद्र मंथन में प्रकट हुई रमा को ,
लम्बी प्रतिक्षा के बाद पाया है ,
विधि का विधान था हमारा वियोग ,
उस वियोग को भोग कर पाया है ।
मत छूना कागा मेरी सिए को ,
मैनें उसे बड़े प्रयत्न से पाया है …
राजा जनक ने किशोरी सीता को ,
धरती का सीना फाड़ कर पाया है ,
राम ने शिव के धनुष को तोड़ कर
सीता को स्वयंवर जीत कर पाया है ।
मत छूना कागा मेरी सिए को ,
मैनें उसे बड़े प्रयत्न से पाया है …
वनवास के काटों को चुन चुन कर ,
सीता के सुकोमल तन को बचाया है ,
अनगिनत राक्षसों के प्रहार से ,
सीता के चरित्र को बचाया है ।
मत छूना कागा मेरी सिए को ,
मैनें उसे बड़े प्रयत्न से पाया है …
॑श्री राम की अर्द्धांगिनी सीता को ,
जब रावण ने छल से चुराया था ,
तब राम ने सेतु बनाकर रावण को ,
कुटुम्ब सहित मृत्युलोक पहुचायाँ है ।
मत छूना कागा मेरी सिए को ,
मैनें उसे बड़े प्रयत्न से पाया है …
राजा राम ने धर्म की रक्षा करने हेतु ,
स्वयं को धर्म संकट में पाया है ,
प्रभु राम अपनी सीता से दूर रहकर ,
सीता राम से पुरुषोत्तम कहलाया है ।
मत छूना कागा मेरी सिए को ,
मैनें उसे बड़े प्रयत्न से पाया है …
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