Khyaal The Path Of Truth

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शिवरात्रि
शिवरात्रि बादल , बिजली , बरखा , सब काशी आ गए हैं, बारात की तैयारी है, क्योंकि उमा को शिव भा गए हैं।
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गुरु और प्रज्ञ
गुरु और प्रज्ञ ध्यान है मस्तिष्क का भोजन , विचार करें और समझाए , अतित की नींव पर भविष्य की योजना बनाएं । जप तप की साधना , मन की व्याकुलता को भ
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नव रस और प्रकृति
नव रस और प्रकृति नव रस का रसपान , प्रकृति करती हर पल , विभक्त नही है कोई किसी से , शुद्ध से सकल । सिन्दूरी पटल , हरी वसुंधरा , और समुन्द्र का सार, नीला - नीला गगन , और चांद तारों का " श्रृंगार "।
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श्री कृष्ण की शिक्षा
श्री कृष्ण की शिक्षा रासलीला रचकर, दी शिक्षा श्री कृष्ण ने, मत करना काम, अर्थ समझाया निष्काम प्रेम ने। मथुरा से पलायन कर, दी शिक्षा श्री कृष्ण ने, मत बहाना रक्त, निजी स्वार्थ की भावना में।
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वात्सल्य का भेद
वात्सल्य का भेद बिना भोजन किए मेरा पेट भरने लगी, तृप्त करके मुझे सीने से लगाने लगी। मेरी मुस्कराहट से वो मुस्कराने लगी, गोद में मुझे भरकर वात्सल्य पाने लगी।
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शिव धाम
शिव धाम विश्व मुक्ति हेतु बनाया काशी को धाम, शिवगण कर रहे काशी का आयाम, नमन करते है इस भूमि को सूबह शाम, एक बार अवश्य आए काशी विश्वनाथ धाम।
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कबीरमन
कबीरमन मानव शरीर जिसने बनाया, उसके नाम अनेक, पूरब - पश्चिम, उत्तर - दक्षिण, धरती माता एक।
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राम राज में अच्छे दिन
राम राज में अच्छे दिन राम राज में 'श्री राम' को सुख नाही, और माँ सीता को वियोग का दुख, राम राज में देवों को सुख नाही, और दानव को मिट जाने का दुख।
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साहित्य के रंग
साहित्य के रंग साहित्य का योगदान, या शब्दों का व्यापार, कहीं किसी की गुण गाथा, तो कहीं किसी का बहिष्कार।
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क्यों
क्यों रघु ही जाने 'रघु' की धूरी, जीवन से मृत्यु की दूरी, जीवन है तो तेरे है, मृत्यु है तो भी तेरे है, तब क्यों पाप – पुण्य के फेरे मेरे है।
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कहाँ
कहाँ जिसे ढूंढा हर तीर्थ में, वो मिला हर बीज में, मंत्र संग्रहित न कर पाए जिसे, मिला वो तेरी मेरी प्रीत में।
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वर्ण व्यवस्था या धर्म व्यवस्था
वर्ण व्यवस्था या धर्म व्यवस्था धर्म व्यवस्था वर्ण व्यवस्था, न गलत होती समाजिक व्यवस्था, उपाय नहीं है धर्म परिवर्तन, धर्म है मानव की मानवता।
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हरिजन
हरिजन न कोई उत्तम न कोई घृणित, हरिजन हरि को अर्पित, चार वर्ण चारों वर्णित, हरिजन संग हरि सुसज्जित।
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जीवों पर दया
जीवों पर दया कुरान हो या पुराण, अंकुश सब पर लग रहा, आधुनिक आदि मानव, मतलब धर्म का बदल रहा।
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राधे कृष्णा
राधे कृष्णा मनमोहन है मेरा कृष्ण कन्हैया, ये बात जाने है सारी दुनिया, ग्वालों के संग गाय चराय, सखियों के संग रास रचाए,
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शिव पार्वती से
शिव पार्वती से वचन दो... हर युग में, हर युग के महिषासुर का वध करोगी... क्योंकि हर पुरुष शिव नही होता ॐनमःशिवाय ॐनमःशिवाय...
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भारत विश्व गुरु
भारत विश्व गुरु काशी ढुंडे कबीर को, कबीर ढुंढ़यो मोए, विश्व गुरु भारत बने, तब कलम क्यूँ रोए। कलम न लगाए वृक्ष, कलम न बनाए सरोवर, मंगल पर पानी ढुंडे, करें कागज को तर।
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मंथन
मंथन सागर मंथन में सबसे पहले निकलता जहर, बडप्पन कहता है इसे पी ले सहज। सागर के मंथन मे जब निकला ज्ञान, चारों वेद है अलौकिक, अनुभूति से जान।
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दर्शन
दर्शन दर्शन की चाह थी, सुबह मंदिर का रूख लिया। .... विलम्ब हुआ है मुझ को, दर्शन का समय खत्म हो गया। चार रूपों में देखा तुझको, भंगी, सहायक, बूढ़ा और कन्या। तृप्त हुआ मैं दर्शन पाकर, हर रूप में तूने दर्शन दिया।
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पञ्चतत्व
पञ्चतत्व तेरे घर में एक कच्ची मिट्टी पनप रही है, वो सबके प्यार दुलार में पल रही है। उसे तुम जल से गूंथना, हवा में सुखाना, अग्नि में तपाकर एक अच्छा इंसान बनाना।
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मिट्टी और राख
मिट्टी और राख मेरी मंजिल तू है, पर तेरी मंजिल मैं हूँ, तू कलंक है या काजल, पर भू पटल मैं हूँ। जीवन के चक्र का एक बिंदु मैं, दूसरा तू है, मैं 'राग' का आरोह हूँ, तो अबरोह तू हैं।
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वो
वो कुछ शरमाई, कुछ घबराई, जब खिलकर हँस पड़ी थी वो। मैनें पूछा कहाँ जा रही हो तुम, सन-सन, सन–सन गुजर रही थी वो।
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सच्चाई
सच्चाई दिल भी मैं, दिमाग भी मैं, अर्पण ही सच्चाई हैं। आत्मा भी मैं, परमात्मा भी मैं, समर्पण ही सच्चाई हैं।
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नयाजमाना
नयाजमाना बुद्धि का किया विसर्जन, पहुचायाँ अन्नत धाम। वैराग्य नही है जिसमें, कागजों से ढक दिया ज्ञान। शब्दों के ढेर को , मत कहिए ज्ञान। असर्फियों के ढेर में, ज्ञान चाकर समान।
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पञ्चतत्वकामन्दिर
पञ्चतत्वकामन्दिर पुजलें ए मानव 'पंचतत्व का मन्दिर ',
तन मन स्वच्छ करके, चल धर्म पथ पर।
धर्म है तेरा, नि:स्वार्थ कर्म को करना ,
मिथ्या नहीं रह जाएगा तेरा ईश्वर को भजना।
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संकटमोचनहनुमान
संकटमोचनहनुमान पवन से उत्पन्न 'वायु वेग' ढ़क देता है 'सुर्य' को, तब मानो निगल गया 'पवनपुत्र' सुर्य को। अंधेरा ही अंधेरा छा जाता है तब पृथ्वी पर, हर श्वास कहती है प्रभु दया करो हम पर।
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कर्मभेद
कर्मभेद 'ज्ञान' श्री राम का जिन्होंने दिया, सेबरी माता को सम्मान। ज्ञान रावण का जिसने किया, सीता माता का अपमान। 'श्रेष्ठता' श्रीकृष्ण की जिन्होंने दिया, सोलह हजार रानियों को घर।
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नारी का अस्तित्व
नारी का अस्तित्व जस 'नारी' 'तस' 'नदी', तीरे-तीर आन, जिसकी मर्यादा को पिता, पति, पुत्र, बांधे बांध। राख न होती कभी, सकरी हो जाती, ऊ:स्थल से मुख मोड़, नि:स्थल पर राह बनाती।
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चावल के दो दाने
चावल के दो दाने तृप्त हुए कृष्ण खाकर चावल के दो दानें, पेट भर दिया सबका खाकर चावल के दो दाने मन भरमाया ऋषि - मुनियों का जब, लौट गए ऋषि - मुनि आशिष देकर तब ।
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गीता के अनुसार | मोह , क्रोध ,लोभ और घमंड
गीता के अनुसार | मोह , क्रोध ,लोभ और घमंड भगवत गीता एक प्राचीन हिंदू ग्रंथ है। यह भगवान कृष्ण और उनके मित्र अर्जुन के बीच का संवाद है। भागवत गीता में जीवन पर कुछ सबसे प्रेरणादायक उद्धरण हैं। उनमें से एक अभिमान के बारे में है, जो कहता है कि अभिमान तब तक बुरी बात नहीं है जब तक वह दंभ और अहंकार की ओर नहीं ले जाता।
विचाराधीन उद्धरण जाता है:
"अभिमान आपको कुछ करने के लिए नहीं बनाता है लेकिन यह आपको कई काम करने से रोकता है।"
इस उद्धरण का अर्थ है कि अभिमान व्यक्ति को अपने लक्ष्यों पर केंद्रित रहने में मदद करता है और उन्हें अन्य चीजों से विचलित होने से रोकता है।
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रघुशाला | सच्ची भक्ति | आध्यात्मिक मार्ग
रघुशाला | सच्ची भक्ति | आध्यात्मिक मार्ग यह भक्ति पर कविता है। यह भारत में एक बहुत लोकप्रिय विषय है और इसे अक्सर कविताओं के रूप में व्यक्त किया जाता है। यहां हिंदी में कुछ आध्यात्मिक उद्धरण दिए गए हैं जो आपको भक्ति के अर्थ को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेंगे भक्त वह है जिसने सभी सांसारिक सुखों को त्याग दिया है, जो संसार और उसके सभी आकर्षणों से अलग रहता है। उन्होंने सभी इच्छाओं को त्याग दिया है और अपनी कंपनी में संतुष्ट हैं। उसकी पूजा करने की कोई इच्छा नहीं है, लेकिन वह हमेशा भगवान की पूजा करने के लिए तैयार रहता है। मैं उस भगवान का भक्त हूं जो मेरे हृदय में निवास करता है, जिसका रूप पत्थर या मिट्टी का नहीं है। मैं उस प्रभु का दास हूं जो मेरे हृदय में निवास करता है, जिसका रूप पत्थर या मिट्टी का नहीं है। मैं अपने दिल के भीतर इस घर के अलावा किसी और घर को नहीं जानता जहां प्रिय हमेशा और हमेशा रहता है।
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गणेश जी पर कविता |  सफलता के देवता
गणेश जी पर कविता | सफलता के देवता इस कविता मे गणेश जी को उनके विभिन्न पहलुओं में तलाशने की कोशिश की है, विशेष रूप से मानव जैसे गुणों वाले देवता के रूप में। उन्होंने यह भी समझने की कोशिश की है कि हाथी होने का क्या मतलब है और इस जानवर ने भारतीय संस्कृति को कैसे आकार दिया है। गणेश जी ज्ञान, समृद्धि और सौभाग्य के हिंदू देवता हैं। वह हिंदू देवताओं में सबसे लोकप्रिय देवताओं में से एक है।

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