Khyaal The Path Of Truth

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समय का मूल्य | Value of Time
समय का मूल्य | Value of Time सूरज की बारीक किरण ,
अंधेरे को चीरती हुई ,
कमरे में प्रकट हुई ,
तब पलकें बदुबदुाने लगी ,
और तन अगंड़ाई लेने लगा ,
आलस दूर भागने लगा ,
घड़ी की ओर देखा ,
और चौंककर उठ गई ,
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जीवन की कक्षाएं
जीवन की कक्षाएं जीवन की परतों को खोलकर देखा , पर कुछ न मिला ,
लाख आँसू बहाएं , पर कुछ न मिला ,
न समझी मे ये भलू बैठा कि ये परतें ही तो जीवन है।

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चरित्रवान
चरित्रवान अगर चरित्र हो श्वेत , स्वच्छ , और निर्मल ,
तो उसमे हजारों रंग भर लेना ,
वरना ये दुनिया उसमे दाग ढूँढेगी ।

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स्वावलंबी  बनो
स्वावलंबी बनो यूं तो सबको खशु रखना बहुत कठिन है,
पर किसी को दखु नहीं दिया इसलिए खशु हैं,

जिन्होंने कभी किसी को दखु दिया है,
उन पर समय का पलटवार होते देखा है,

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शिवरात्रि
शिवरात्रि बादल , बिजली , बरखा , सब काशी आ गए हैं, बारात की तैयारी है, क्योंकि उमा को शिव भा गए हैं।
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बदंू जब बन जाए मोती
बदंू जब बन जाए मोती धरती ओढ़े मेघो का आचं ल ,
छलक जाए जब काले बादल ,

बरखा चली धरा सगं मि लने,
जसै े बि टि या जा रही हो मईके
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Maana mai tera pehla pyaar to nhi
Maana mai tera pehla pyaar to nhi Maana mai tera pehla pyaar to nhi lekin aakhri banna chahta hu, khaye hai thokar jis safar par tune mai us safar me tera humsafar banna chahta hu.
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Friendship Quotes
Friendship Quotes Dear Dost, Aane wala waqt chahe jaisa v ho, life me kitne bhi ch**t*ye OR chunautiyan aaye, ek baat sure hai, humlog hamesha sath rhe ge, aur milkar samna karenge
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सीता राम से पुरुषोत्तम राम
सीता राम से पुरुषोत्तम राम मत छूना कागा मेरी सिए को , मैनें उसे बड़े प्रयत्न से पाया है …
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पथ पर पग
पथ पर पग पंथी पथ पर और पथ पर पंथी के पग नही , पग पग पर कांटे है कांटो को कोई हटाता नही क्यों जन्म लिया मैंने इस धरती पर कोई बताता नही ।
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हिंसा और अहिंसा
हिंसा और अहिंसा हिंसा और अहिंसा का मतभेद बहुत पुराना है ,
धर्म और अधर्म से नाता उसका पुराना है ।
'अहिंसा' नही है कायर , क्यों मौन रहें ,
वाद विवाद की चुनौती मे भी सक्रिय रहे ।
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मेरेकलम
मेरेकलम ओ मेरे कलम जरा रुक -रुक कर चल ,
श्वेत पटल खोज रही हूँ जरा थमकर चल ।
स्याह रंग किस पर बिखेरू जरा सोचकर चल ,
आलोचनाओं की धूल को जरा पोंछ कर चल ।
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जीवन चक्र
जीवन चक्र कुछ बिखरे तिनके है ,
वो कुछ कह रहे है ,
घोसला खाली है ,
और पंछी उड़ गए है ।
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श्री कृष्ण की शिक्षा
श्री कृष्ण की शिक्षा रासलीला रचकर, दी शिक्षा श्री कृष्ण ने, मत करना काम, अर्थ समझाया निष्काम प्रेम ने। मथुरा से पलायन कर, दी शिक्षा श्री कृष्ण ने, मत बहाना रक्त, निजी स्वार्थ की भावना में।
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माँ की शिक्षा
माँ की शिक्षा माता सरस्वती::: माँ होती हैं प्रथम गुरु जो बनाती है समाज का भविष्य, देव बने या दानव माँ करती है निश्चय।
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सतर्क रहें
सतर्क रहें अधिक मिठास करती मुख कड़वा, जिसके पीछे होता छल, चक्रव्यूह है जीवन संरचना, सतर्कता ही है इसका हल।
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वात्सल्य का भेद
वात्सल्य का भेद बिना भोजन किए मेरा पेट भरने लगी, तृप्त करके मुझे सीने से लगाने लगी। मेरी मुस्कराहट से वो मुस्कराने लगी, गोद में मुझे भरकर वात्सल्य पाने लगी।
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कबीरमन
कबीरमन मानव शरीर जिसने बनाया, उसके नाम अनेक, पूरब - पश्चिम, उत्तर - दक्षिण, धरती माता एक।
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राम राज में अच्छे दिन
राम राज में अच्छे दिन राम राज में 'श्री राम' को सुख नाही, और माँ सीता को वियोग का दुख, राम राज में देवों को सुख नाही, और दानव को मिट जाने का दुख।
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हम
हम आज तू उस ईश्वर का ध्यान लगा लें, मै - मेरा, तू - तेरा को 'हम' बना लें।
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कुरुक्षेत्र
कुरुक्षेत्र गीता दे रही दस्तक हर युग में, दुर्बुद्धि अडिग बनकर खड़ा है, माताएं विजय का आशीर्वाद कैसे दे, आंचल का आंचल पर कर्ज बड़ा है।
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विद्यालय की प्रार्थना
विद्यालय की प्रार्थना जीवन का अमूल्य धन है, बल, बुद्धि और विद्या, चुरा न सका जिसे कोई, न वस्तु, न कोई संज्ञा।
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फूल और पत्थर
फूल और पत्थर हाथों में अस्त्र शस्त्र सुसज्जित देखा है, लेकिन, अधर पर मुस्कान देखा है, मोहित है, सभी इस मुस्कान से, हाँ, मैनें पत्थरों को मुस्कराते देखा है।
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साहित्य के रंग
साहित्य के रंग साहित्य का योगदान, या शब्दों का व्यापार, कहीं किसी की गुण गाथा, तो कहीं किसी का बहिष्कार।
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क्यों
क्यों रघु ही जाने 'रघु' की धूरी, जीवन से मृत्यु की दूरी, जीवन है तो तेरे है, मृत्यु है तो भी तेरे है, तब क्यों पाप – पुण्य के फेरे मेरे है।
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कहाँ
कहाँ जिसे ढूंढा हर तीर्थ में, वो मिला हर बीज में, मंत्र संग्रहित न कर पाए जिसे, मिला वो तेरी मेरी प्रीत में।
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वर्ण व्यवस्था या धर्म व्यवस्था
वर्ण व्यवस्था या धर्म व्यवस्था धर्म व्यवस्था वर्ण व्यवस्था, न गलत होती समाजिक व्यवस्था, उपाय नहीं है धर्म परिवर्तन, धर्म है मानव की मानवता।
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हरिजन
हरिजन न कोई उत्तम न कोई घृणित, हरिजन हरि को अर्पित, चार वर्ण चारों वर्णित, हरिजन संग हरि सुसज्जित।
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जीवों पर दया
जीवों पर दया कुरान हो या पुराण, अंकुश सब पर लग रहा, आधुनिक आदि मानव, मतलब धर्म का बदल रहा।
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दस
दस शून्य तू है, एक मैं हूँ, कब तक रहूँ अकेला, दूजा ढूंढा तो मिला, ये दुनिया का मेला।
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प्यार से एहसान तक
प्यार से एहसान तक प्यार, प्रेम, प्रीत सम्बन्धों की डोरी, नारा, सूत, रेशम, कच्चे धागो की डोरी। संभाली है हमने जिसे सदियों से, संबंधो को बांधा है हमने नदियों से।
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राधे कृष्णा
राधे कृष्णा मनमोहन है मेरा कृष्ण कन्हैया, ये बात जाने है सारी दुनिया, ग्वालों के संग गाय चराय, सखियों के संग रास रचाए,
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शिव पार्वती से
शिव पार्वती से वचन दो... हर युग में, हर युग के महिषासुर का वध करोगी... क्योंकि हर पुरुष शिव नही होता ॐनमःशिवाय ॐनमःशिवाय...
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भारत विश्व गुरु
भारत विश्व गुरु काशी ढुंडे कबीर को, कबीर ढुंढ़यो मोए, विश्व गुरु भारत बने, तब कलम क्यूँ रोए। कलम न लगाए वृक्ष, कलम न बनाए सरोवर, मंगल पर पानी ढुंडे, करें कागज को तर।
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मंथन
मंथन सागर मंथन में सबसे पहले निकलता जहर, बडप्पन कहता है इसे पी ले सहज। सागर के मंथन मे जब निकला ज्ञान, चारों वेद है अलौकिक, अनुभूति से जान।
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दर्शन
दर्शन दर्शन की चाह थी, सुबह मंदिर का रूख लिया। .... विलम्ब हुआ है मुझ को, दर्शन का समय खत्म हो गया। चार रूपों में देखा तुझको, भंगी, सहायक, बूढ़ा और कन्या। तृप्त हुआ मैं दर्शन पाकर, हर रूप में तूने दर्शन दिया।
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पञ्चतत्व
पञ्चतत्व तेरे घर में एक कच्ची मिट्टी पनप रही है, वो सबके प्यार दुलार में पल रही है। उसे तुम जल से गूंथना, हवा में सुखाना, अग्नि में तपाकर एक अच्छा इंसान बनाना।
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मिट्टी और राख
मिट्टी और राख मेरी मंजिल तू है, पर तेरी मंजिल मैं हूँ, तू कलंक है या काजल, पर भू पटल मैं हूँ। जीवन के चक्र का एक बिंदु मैं, दूसरा तू है, मैं 'राग' का आरोह हूँ, तो अबरोह तू हैं।
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वो
वो कुछ शरमाई, कुछ घबराई, जब खिलकर हँस पड़ी थी वो। मैनें पूछा कहाँ जा रही हो तुम, सन-सन, सन–सन गुजर रही थी वो।
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सच्चाई
सच्चाई दिल भी मैं, दिमाग भी मैं, अर्पण ही सच्चाई हैं। आत्मा भी मैं, परमात्मा भी मैं, समर्पण ही सच्चाई हैं।
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नयाजमाना
नयाजमाना बुद्धि का किया विसर्जन, पहुचायाँ अन्नत धाम। वैराग्य नही है जिसमें, कागजों से ढक दिया ज्ञान। शब्दों के ढेर को , मत कहिए ज्ञान। असर्फियों के ढेर में, ज्ञान चाकर समान।
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पञ्चतत्वकामन्दिर
पञ्चतत्वकामन्दिर पुजलें ए मानव 'पंचतत्व का मन्दिर ',
तन मन स्वच्छ करके, चल धर्म पथ पर।
धर्म है तेरा, नि:स्वार्थ कर्म को करना ,
मिथ्या नहीं रह जाएगा तेरा ईश्वर को भजना।
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संकटमोचनहनुमान
संकटमोचनहनुमान पवन से उत्पन्न 'वायु वेग' ढ़क देता है 'सुर्य' को, तब मानो निगल गया 'पवनपुत्र' सुर्य को। अंधेरा ही अंधेरा छा जाता है तब पृथ्वी पर, हर श्वास कहती है प्रभु दया करो हम पर।
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कर्मभेद
कर्मभेद 'ज्ञान' श्री राम का जिन्होंने दिया, सेबरी माता को सम्मान। ज्ञान रावण का जिसने किया, सीता माता का अपमान। 'श्रेष्ठता' श्रीकृष्ण की जिन्होंने दिया, सोलह हजार रानियों को घर।
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सोम रस
सोम रस उस दृश्य को निहार रहा हूँ, जब लेता है सुर्य जल समाधि। सागर करता है किल्लोल, देखो पकडा़ गया मेरा अपराधी। अपनी लहरों में समाकर, खुश था पकड़ कर उसका अक्ष। सागर की ऊँची-ऊँची लहरें, पा नहीं सकी उसे प्रत्यक्ष।
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चिराग
चिराग चिराग ' छिपाने से कभी नही छिप सकता है
हर छिद्र से अपने होने का प्रमाण देता है ।
'चिराग' को छिपाओं न घर जल जाएगा ,
उसे आंगन मे रखदो घर रोशन हो जाएगा।
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आकाश और खुशी
आकाश और खुशी जीवन के दो अंग - आकाश और खुशी , इस 'आकाश 'में जीवन डोर और पतंग खुशी । आकाश बिना जीवन की कोई कल्पना नहीं , अथाह प्रयास करने पर भी खुशी मिलती नहीं।
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जीवन वास्तव में कैसा होना चाहिए | प्रेरक कविता
जीवन वास्तव में कैसा होना चाहिए | प्रेरक कविता एक जीवन एक अच्छा जीवन नहीं है क्योंकि यह लंबा है। यह अच्छा है अगर इसे गरिमा, सम्मान और सम्मान के साथ जिया गया है। यह अच्छा है अगर हम अपने जीवन को उस तरह से जीने में सक्षम हैं जैसा हम चाहते हैं। जीवन खुशियों और खुशियों से भरा होना चाहिए। इसे उन लोगों के साथ खर्च करना चाहिए जो हमसे प्यार करते हैं और हमारी परवाह करते हैं। हमें उन चीजों को आगे बढ़ाने का मौका मिलना चाहिए जो हमें खुश करती हैं और हमें अपने जीवन में अर्थ देती हैं।
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रघुशाला | सच्ची भक्ति | आध्यात्मिक मार्ग
रघुशाला | सच्ची भक्ति | आध्यात्मिक मार्ग यह भक्ति पर कविता है। यह भारत में एक बहुत लोकप्रिय विषय है और इसे अक्सर कविताओं के रूप में व्यक्त किया जाता है। यहां हिंदी में कुछ आध्यात्मिक उद्धरण दिए गए हैं जो आपको भक्ति के अर्थ को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेंगे भक्त वह है जिसने सभी सांसारिक सुखों को त्याग दिया है, जो संसार और उसके सभी आकर्षणों से अलग रहता है। उन्होंने सभी इच्छाओं को त्याग दिया है और अपनी कंपनी में संतुष्ट हैं। उसकी पूजा करने की कोई इच्छा नहीं है, लेकिन वह हमेशा भगवान की पूजा करने के लिए तैयार रहता है। मैं उस भगवान का भक्त हूं जो मेरे हृदय में निवास करता है, जिसका रूप पत्थर या मिट्टी का नहीं है। मैं उस प्रभु का दास हूं जो मेरे हृदय में निवास करता है, जिसका रूप पत्थर या मिट्टी का नहीं है। मैं अपने दिल के भीतर इस घर के अलावा किसी और घर को नहीं जानता जहां प्रिय हमेशा और हमेशा रहता है।
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गणेश जी पर कविता |  सफलता के देवता
गणेश जी पर कविता | सफलता के देवता इस कविता मे गणेश जी को उनके विभिन्न पहलुओं में तलाशने की कोशिश की है, विशेष रूप से मानव जैसे गुणों वाले देवता के रूप में। उन्होंने यह भी समझने की कोशिश की है कि हाथी होने का क्या मतलब है और इस जानवर ने भारतीय संस्कृति को कैसे आकार दिया है। गणेश जी ज्ञान, समृद्धि और सौभाग्य के हिंदू देवता हैं। वह हिंदू देवताओं में सबसे लोकप्रिय देवताओं में से एक है।

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