Khyaal The Path Of Truth

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शिव पार्वती से
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शिव पार्वती से वचन दो... हर युग में, हर युग के महिषासुर का वध करोगी... क्योंकि हर पुरुष शिव नही होता ॐनमःशिवाय ॐनमःशिवाय...
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राधे कृष्णा
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राधे कृष्णा मनमोहन है मेरा कृष्ण कन्हैया, ये बात जाने है सारी दुनिया, ग्वालों के संग गाय चराय, सखियों के संग रास रचाए,
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प्यार से एहसान तक
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प्यार से एहसान तक प्यार, प्रेम, प्रीत सम्बन्धों की डोरी, नारा, सूत, रेशम, कच्चे धागो की डोरी। संभाली है हमने जिसे सदियों से, संबंधो को बांधा है हमने नदियों से।
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दस
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दस शून्य तू है, एक मैं हूँ, कब तक रहूँ अकेला, दूजा ढूंढा तो मिला, ये दुनिया का मेला।
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जीवों पर दया
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जीवों पर दया कुरान हो या पुराण, अंकुश सब पर लग रहा, आधुनिक आदि मानव, मतलब धर्म का बदल रहा।
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हरिजन
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हरिजन न कोई उत्तम न कोई घृणित, हरिजन हरि को अर्पित, चार वर्ण चारों वर्णित, हरिजन संग हरि सुसज्जित।
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वर्ण व्यवस्था या धर्म व्यवस्था
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वर्ण व्यवस्था या धर्म व्यवस्था धर्म व्यवस्था वर्ण व्यवस्था, न गलत होती समाजिक व्यवस्था, उपाय नहीं है धर्म परिवर्तन, धर्म है मानव की मानवता।
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कहाँ
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कहाँ जिसे ढूंढा हर तीर्थ में, वो मिला हर बीज में, मंत्र संग्रहित न कर पाए जिसे, मिला वो तेरी मेरी प्रीत में।
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क्यों
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क्यों रघु ही जाने 'रघु' की धूरी, जीवन से मृत्यु की दूरी, जीवन है तो तेरे है, मृत्यु है तो भी तेरे है, तब क्यों पाप – पुण्य के फेरे मेरे है।
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साहित्य के रंग
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साहित्य के रंग साहित्य का योगदान, या शब्दों का व्यापार, कहीं किसी की गुण गाथा, तो कहीं किसी का बहिष्कार।

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